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سبأआयत 24

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ قُلِ ٱللَّهُ ۖ وَإِنَّآ أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ ﴿٢٤﴾

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : तुम्हें आकाशों से बारिश उतारकर और धरती से फल, फसलें, मेवे और अन्य चीज़ें उगाकर रोज़ी कौन देता है? आप कह दें : अल्लाह ही है, जो तुम्हें इनसे जीविका प्रदान करता है। और निश्चय हम या (ऐ मुश्रिको!) तुम लोग अवश्य सन्मार्ग पर हैं अथवा खुली गुमराही में हैं। हम में से कोई एक अनिवार्य रूप से ऐसा है। और इसमें कोई संदेह नहीं कि हिदायत वाले लोग ईमान वाले ही हैं, और गुमराही वाले लोग बहुदेववादी ही हैं।