तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَفَلَمْ يَرَوْا۟ إِلَىٰ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۚ إِن نَّشَأْ نَخْسِفْ بِهِمُ ٱلْأَرْضَ أَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً لِّكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ ﴿٩﴾
क्या मरणोपरांत पुनर्जीवन को झुठलाने वाले ये लोग, अपने आगे धरती को तथा अपने पीछे आकाश को नहीं देखते? यदि हम उनके पैरों के नीचे से धरती को धँसाना चाहें, तो हम उसे धंँसा सकते हैं। और यदि हम उनपर आकाश के टुकड़े गिराना चाहें, तो हम उनपर उन्हें गिरा सकते हैं। निःसंदेह इसमें हर उस बंदे के लिए, जो अपने पालनहार की आज्ञाकारिता की ओर बहुलता से लौटने वाला है, एक निश्चित संकेत है, जिससे वह अल्लाह की शक्ति का प्रमाण ग्रहण करता है। क्योंकि जो ऐसा करने में सक्षम है, वह तुम्हारी मृत्यु तथा तुम्हारे शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाने के पश्चात्, तुम्हें पुनर्जीवित करने में भी सक्षम है।