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يسआयत 25

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنِّىٓ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمْ فَٱسْمَعُونِ ﴿٢٥﴾

निःसंदेह (ऐ मेरी जाति के लोगो) मैं अपने तथा तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो। मुझे उस क़त्ल की परवाह नहीं है, जिसकी तुम मुझे धमकी दे रहे हो। फिर क्या था, उसकी जाति ने उसे मार डाला। तो अल्लाह ने उसे जन्नत में दाखिल कर दिया।