तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ﴿٣٥﴾
इन मुश्रिकों से जब दुनिया में कहा जाता था कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, ताकि उसकी अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करें और उसके विपरीत चीज़ों को छोड़ दें, तो वे सत्य से अभिमान और घमंड करते हुए उसे क़बूल करने और मानने से इनकार कर देते थे।