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الصافاتआयत 65

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَـٰطِينِ ﴿٦٥﴾

इसका जो फल निकलता है, वह देखने में बद्सूरत होता है, मानो वह शैतानों का सिर हो, और दृष्टि की कुरूपता अंतरमन की कुरूपता का प्रमाण है। और इसका अर्थ यह है कि इसके फल का स्वाद बहुत खराब है।