तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قَالَ لَقَدْ ظَلَمَكَ بِسُؤَالِ نَعْجَتِكَ إِلَىٰ نِعَاجِهِۦ ۖ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ ٱلْخُلَطَآءِ لَيَبْغِى بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَقَلِيلٌ مَّا هُمْ ۗ وَظَنَّ دَاوُۥدُ أَنَّمَا فَتَنَّـٰهُ فَٱسْتَغْفَرَ رَبَّهُۥ وَخَرَّ رَاكِعًا وَأَنَابَ ۩ ﴿٢٤﴾
दाऊद अलैहिस्सलाम ने उन दोनों के बीच निर्णय किया और दावेदार को संबोधित करते हुए कहा : तुम्हारे भाई ने तुम्हारी दुंबी को अपनी दुंबियों के साथ मिलाने की माँग करके तुमपर ज़ुल्म किया है। सच्चाई यह है कि बहुत-से साझीदार अपने साथी का हक़ दबाकर और इंसाफ़ से मुँह मोड़कर एक-दूसरे पर अत्याचार करते हैं। अलबत्ता, उन ईमान वालों का मामला अलग है, जो अच्छे कार्य करते हैं। वे अपने साझीदारों के साथ न्याय करते हैं और उनपर अत्याचार नहीं करते। लेकिन इस तरह के लोग बहुत कम हैं। और दाऊद अलैहिस्सलाम को यक़ीन हो गया कि इस झगड़े के द्वारा हमने उन्हें आज़माइश में डाला है। चुनाँचे उन्होंने अपने पालनहार से क्षमा याचना की, अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए सजदे में गिर पड़े और उसकी ओर लौट आए।