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صआयत 42

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ٱرْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَـٰذَا مُغْتَسَلٌۢ بَارِدٌ وَشَرَابٌ ﴿٤٢﴾

तो हमने उनसे कहा : अपने पाँव को धरती पर मारो। चुनाँचे उन्होंने अपना पाँव धरती पर मारा, तो उनके लिए उससे पानी का स्रोत फूट पड़ा, जिससे वह पी सकें और स्नान कर सकें और उनकी परेशानी और कष्ट दूर हो जाए।