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الزمرआयत 35

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لِيُكَفِّرَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ أَسْوَأَ ٱلَّذِى عَمِلُوا۟ وَيَجْزِيَهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿٣٥﴾

ताकि अल्लाह उनके बुरे कर्मों को, जो वे संसार में करते थे, क्षमा याचना एवं अपने पालनहार के सामने गिड़गिड़ाने के कारण माफ़ कर दे और उनके अच्छे कर्मों का, जो वे करते थे, प्रतिफल प्रदान करे।