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الزمرआयत 45

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَإِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَحْدَهُ ٱشْمَأَزَّتْ قُلُوبُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَإِذَا ذُكِرَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦٓ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ ﴿٤٥﴾

और जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन मुश्रिकों के दिल संकीर्ण होने लगते हैं, जो आख़िरत तथा उस दिन के जीवित होकर उठने, हिसाब-किताब और जज़ा-सज़ा पर ईमान नहीं रखते। परन्तु जब उन मूर्तियों का ज़िक्र किया जाता है, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं , तो बड़े प्रसन्न हो जाते हैं।