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النساءआयत 166

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لَّـٰكِنِ ٱللَّهُ يَشْهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيْكَ ۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلْمِهِۦ ۖ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَشْهَدُونَ ۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا ﴿١٦٦﴾

यदि यहूद आपका इनकार करते हैं, तो अल्लाह उस क़ुरआन की प्रामाणिकता के संबंध में आपकी पुष्टि करता है, जो उसने (ऐ रसूल!) आपकी ओर उतारा है। अल्लाह ने उसमें अपना वह ज्ञान उतारा है, जिससे वह अपने बंदों को अवगत कराना चाहता है, कि वह किन चीज़ों को पसंद करता और उनसे प्रसन्न होता है या किन चीज़ों को नापसंद करता और उनसे नफरता करता है। अल्लाह की गवाही के साथ फ़रिश्ते भी उसकी सच्चाई की गवाही देते हैं जो आप लेकर आए हैं। तथा अल्लाह गवाह के रूप में पर्याप्त है। क्योंकि उसकी गवाही के बाद किसी दूसरे की गवाही की ज़रूरत नहीं।