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النساءआयत 52

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ ۖ وَمَن يَلْعَنِ ٱللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ نَصِيرًا ﴿٥٢﴾

जो लोग इस भ्रष्ट विश्वास को मानते हैं, वही हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से निष्कासित कर दिया है और जिसे अल्लाह (अपनी दया से) निष्कासित कर दे, तो आप कदापि उसका कोई सहायक नहीं पाएँगे,जो उसकी मदद कर सके।