तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَا تَسْمَعُوا۟ لِهَـٰذَا ٱلْقُرْءَانِ وَٱلْغَوْا۟ فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ ﴿٢٦﴾
और काफ़िरों ने, तर्कों का सामना करने से विवश होकर एक-दूसरे को नसीहत करते हुए कहा कि उस क़ुरआन को न सुनो, जो मुहम्मद तुम्हें पढ़कर सुनाता है, और उसकी शिक्षाओं को भी न मानो, और जब उसे पढ़ा जाए तो खूब शोर मचाओ, हो सकता है कि इस तरह तुम उससे जीत जाओ और वह उसकी तिलावत और तुम्हें उसकी ओर बुलाने से बाज़ रहे और हम उससे मुक्ति पा जाएँ।