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الشورىआयत 25

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَهُوَ ٱلَّذِى يَقْبَلُ ٱلتَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِۦ وَيَعْفُوا۟ عَنِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ ﴿٢٥﴾

वही अल्लाह है, जो अपने बंदों की कुफ़्र और गुनाहों से तौबा को क़बूल करता है, यदि वे उसके सामने तौबा करते हैं और उनके किए हुए दुष्कर्मों को क्षमा कर देता है। तथा तुम जो कुछ भी करते हो, वह उसे जानता है। तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।