तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلِبُيُوتِهِمْ أَبْوَٰبًا وَسُرُرًا عَلَيْهَا يَتَّكِـُٔونَ ﴿٣٤﴾
और हम उन्हें ढील देने तथा आज़माने के उद्देश्य से, उनके घरों के द्वार बना देते और उनके लिए ऐसे तख़्त बना देते, जिनपर वे तकिया लगाकर बैठते।
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلِبُيُوتِهِمْ أَبْوَٰبًا وَسُرُرًا عَلَيْهَا يَتَّكِـُٔونَ ﴿٣٤﴾