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الزخرفआयत 53

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلَوْلَآ أُلْقِىَ عَلَيْهِ أَسْوِرَةٌ مِّن ذَهَبٍ أَوْ جَآءَ مَعَهُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ مُقْتَرِنِينَ ﴿٥٣﴾

तो उसे रसूल बनाकर भेजने वाले अल्लाह ने उसपर सोने के कंगन क्यों नहीं उतारे; यह दिखाने के लिए कि वह अल्लाह का रसूल है, या उसके साथ सिलसिलेवार फ़रिश्ते क्यों न आए?!