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الزخرفआयत 57

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَلَمَّا ضُرِبَ ٱبْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ ﴿٥٧﴾

जब मुश्रिकों ने यह समझा कि ईसा अलैहिस्सलाम, जिनकी ईसाई पूजा करते हैं, अल्लाह के फरमान : (إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنْتُمْ لَهَا وَارِدُونَ) ''निःसंदेह तुम और जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, सब नरक का ईंधन बनेंगे, तुम उसमें प्रवेश करने वाले हो।'' (सूरतुल अंबिया : 98) में दाखिल हैं, तथा अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की पूजा करने से वैसे ही रोका है, जैसे मूर्तियों की पूजा से रोका है, तो अचानक (ऐ रसूल!) आपकी जाति के लोग खुशी से शोर मचाने लगे और कहने लगे : हम इस बात से संतुष्ट हैं कि हमारे देवता ईसा (अलैहिस्सलाम) की तरह हैं। इसपर अल्लाह ने उनके जवाब में यह आयत उतारी : (إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُمْ مِنَّا الْحُسْنَى أُولَئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ) ''निःसंदेह जिनके के लिए हमारी ओर से पहले भलाई निर्धारित हो चुकी है, वे उस (नरक) से दूर रखे जाएँगे।'' (सूरतुल अंबिया : 101).