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محمدआयत 19

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَٱعْلَمْ أَنَّهُۥ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَٱسْتَغْفِرْ لِذَنۢبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ مُتَقَلَّبَكُمْ وَمَثْوَىٰكُمْ ﴿١٩﴾

तो (ऐ रसूल!) आप यकीन कर लें कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, तथा अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा माँगें और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों के पापों के लिए भी उससे क्षमा माँगे। अल्लाह दिन में तुम्हारे चलने-फिरने और रात में तुम्हारे ठहरने के स्थान को जानता है। उससे उसमें से कुछ भी छिपा नहीं है।