तफ़सीर अल-मुख़्तसर
طَاعَةٌ وَقَوْلٌ مَّعْرُوفٌ ۚ فَإِذَا عَزَمَ ٱلْأَمْرُ فَلَوْ صَدَقُوا۟ ٱللَّهَ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ﴿٢١﴾
अल्लाह के आदेश का पालन करना और भली बात कहना, उनके लिए अच्छा है। फिर जब लड़ना अनिवार्य हो जाए और उसके बिना कोई चारा न हो, तो यदि वे अल्लाह पर अपने ईमान के प्रति और उसकी आज्ञाकारिता में सच्चे रहें, तो यह उनके लिए निफ़ाक़ और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करने से बेहतर होगा।