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محمدआयत 27

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَـٰرَهُمْ ﴿٢٧﴾

तो आप उसे कैसे देखते हैं जिस यातना और विकट स्थिति में वे उस समय होंगे, जब उनके प्राण निकालने पर नियुक्त फरिश्ते, उनके प्राण निकालते हुए, लोहे के हथोड़े से उनके चेहरों और पीठों पर मार रहे होंगे?!