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الفتحआयत 2

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لِّيَغْفِرَ لَكَ ٱللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِن ذَنۢبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ وَيُتِمَّ نِعْمَتَهُۥ عَلَيْكَ وَيَهْدِيَكَ صِرَٰطًا مُّسْتَقِيمًا ﴿٢﴾

ताकि अल्लाह आपके इस विजय से पहले हुए और इसके बाद होने वाले गुनाहों को क्षमा कर दे, और आपके धर्म की मदद करके आपपर अपनी अनुकंपा को पूर्ण कर दे, और आपको सीधे मार्ग पर चलाए, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है और वह इस्लाम का सीधा मार्ग है।