तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا يَسْخَرْ قَوْمٌ مِّن قَوْمٍ عَسَىٰٓ أَن يَكُونُوا۟ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَلَا نِسَآءٌ مِّن نِّسَآءٍ عَسَىٰٓ أَن يَكُنَّ خَيْرًا مِّنْهُنَّ ۖ وَلَا تَلْمِزُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ وَلَا تَنَابَزُوا۟ بِٱلْأَلْقَـٰبِ ۖ بِئْسَ ٱلِٱسْمُ ٱلْفُسُوقُ بَعْدَ ٱلْإِيمَـٰنِ ۚ وَمَن لَّمْ يَتُبْ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ ﴿١١﴾
ऐ अल्लाह पर ईमान लाने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम्हारे पुरुषों का कोई समूह दूसरे समूह का मज़ाक न उड़ाए, संभव है कि जिनका मज़ाक उड़ाया जा रहा है, वे अल्लाह के निकट अच्छे हों, और मायने वही रखता है जो अल्लाह के निकट है। और न कोई स्त्रियाँ दूसरी स्त्रियों का मज़ाक उड़ाएँ, संभव है कि जिन स्त्रियों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है, वे अल्लाह के निकट बेहतर हों। और अपने भाइयों पर दोष न लगाओ, क्योंकि वे तुम्हारी अपनी जानों के दर्जे में हैं। और तुममें से कोई किसी को ऐसी उपाधि के द्वारा शरम न दिलाए, जिसे वह नापसंद करता है, जैसा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन से पहले कुछ अंसारियों का हाल था। तुममें से जो ऐसा करेगा, वह अवज्ञाकारी है। ईमान के बाद अवज्ञा की विशेषता बहुत बुरी विशेषता है। और जिसने इन पापों से तौबा नहीं की, तो वही लोग अपने किए हुए पापों के कारण खुद को विनाश के संसाधनों में लाकर, अपने आपपर अत्याचार करने वाले हैं।