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الحجراتआयत 13

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَـٰكُم مِّن ذَكَرٍ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَـٰكُمْ شُعُوبًا وَقَبَآئِلَ لِتَعَارَفُوٓا۟ ۚ إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ ٱللَّهِ أَتْقَىٰكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ ﴿١٣﴾

ऐ लोगो! हमने तुम्हें एक नर अर्थात् तुम्हारे पिता आदम अलैहिस्सलाम और एक मादा अर्थात् तुम्हारी माँ हव्वा से पैदा किया। इस तरह तुम्हारा वंश एक ही है। इसलिए तुम वंश में एक-दूसरे पर गर्व न करो। फिर उसके बाद हमने तुमको बहुत सी जातियाँ और बिखरे हुए गोत्र बनाए; ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो, न कि उसपर घमंड करो। क्योंकि एक-दूसरे से प्रतिष्ठित होने का मानदंड केवल तक़्वा (परहेज़गारी) है। इसलिए आगे फरमाया : निःसंदहे तुममें सबसे सम्मान वाला अल्लाह के निकट वह है, जो तुममें सबसे ज़्यादा तक़्वा वाला है। निश्चय अल्लाह तुम्हारी स्थितियों को जानने वाला, तुम्हारी पूर्णता और अपूर्णता के बारे में अवगत है, इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।