तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَبَعَثَ ٱللَّهُ غُرَابًا يَبْحَثُ فِى ٱلْأَرْضِ لِيُرِيَهُۥ كَيْفَ يُوَٰرِى سَوْءَةَ أَخِيهِ ۚ قَالَ يَـٰوَيْلَتَىٰٓ أَعَجَزْتُ أَنْ أَكُونَ مِثْلَ هَـٰذَا ٱلْغُرَابِ فَأُوَٰرِىَ سَوْءَةَ أَخِى ۖ فَأَصْبَحَ مِنَ ٱلنَّـٰدِمِينَ ﴿٣١﴾
फिर अल्लाह ने एक कौआ भेजा, जो उसके सामने भूमि को कुरेदता था, ताकि उसमें एक मरे हुए कौए को गाड़कर, उसे यह सिखाए कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। उस समय अपने भाई के हत्यारे ने कहा : हाय मेरा विनाश! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका, जिसने दूसरे मरे हुए कौवे को दफन कर दिया, कि मैं अपने भाई के शव को छिपा सकूँ, फिर उसने उस समय उसे दफ़न किया; इस तरह वह पछताने वालों में से हो गया।