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المائدةआयत 52

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَتَرَى ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ يُسَـٰرِعُونَ فِيهِمْ يَقُولُونَ نَخْشَىٰٓ أَن تُصِيبَنَا دَآئِرَةٌ ۚ فَعَسَى ٱللَّهُ أَن يَأْتِىَ بِٱلْفَتْحِ أَوْ أَمْرٍ مِّنْ عِندِهِۦ فَيُصْبِحُوا۟ عَلَىٰ مَآ أَسَرُّوا۟ فِىٓ أَنفُسِهِمْ نَـٰدِمِينَ ﴿٥٢﴾

तो (ऐ रसूल!) आप कमज़ोर ईमान वाले मुनाफ़िक़ों को यहूदियों तथा ईसाइयों से दोस्ती करने के लिए दौड़ते हुए देखेंगे, कहते हैं : ''हमें डर है कि ये लोग जीत हासिल कर लेंगे, और उनके पास राज्य होगा, फिर हमें उनसे नुक़सान पहुँचेगा।'' तो संभव है कि अल्लाह अपने रसूल तथा मोमिनों को जीत प्रदान कर दे, या अपनी ओर से कोई ऐसा मामला प्रकट कर दे, जिससे यहूदियों और उनके सहयोगियों का प्रभाव (दबदबा) समाप्त हो जाए। फिर उनसे दोस्ती करने के लिए जल्दी करने वाले अपने दिलों में छिपाए हुए निफ़ाक़ पर लज्जित होंगे; क्योंकि जिन कमज़ोर कारणों का उन्होंने सहारा लिया था सब व्यर्थ हो गया।