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المائدةआयत 63

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لَوْلَا يَنْهَىٰهُمُ ٱلرَّبَّـٰنِيُّونَ وَٱلْأَحْبَارُ عَن قَوْلِهِمُ ٱلْإِثْمَ وَأَكْلِهِمُ ٱلسُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ ﴿٦٣﴾

उनके इमाम (पथ-प्रदर्शक) और विद्वान उन्हें झूठ बोलने, झूठी गवाही देने तथा अवैध रूप से लोगों का धन खाने से क्यों नहीं रोकते? उनके इमामों और विद्वानों का रवैया जो उन्हें बुराई करने से मना नहीं करते, बहुत बुरा है।