तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوا۟ قَوَّٰمِينَ لِلَّهِ شُهَدَآءَ بِٱلْقِسْطِ ۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَـَٔانُ قَوْمٍ عَلَىٰٓ أَلَّا تَعْدِلُوا۟ ۚ ٱعْدِلُوا۟ هُوَ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ ﴿٨﴾
ऐ लोगो जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो! अपने ऊपर अनिवार्य अल्लाह के अधिकारों का निष्पादन करो उसके द्वारा उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, तथा न्याय के गवाह बनो, अन्याय के नहीं। किसी जाति की शत्रुता तुम्हें न्याय को त्यागने के लिए प्रेरित न करे। क्योंकि न्याय करना मित्र और शत्रु दोनों के साथ आवश्यक है। इसलिए उन दोनों के साथ न्याय करो। क्योंकि न्याय अल्लाह से डरने के अधिक निकट है, और अन्याय अल्लाह के विरुद्ध दुस्साहस के अधिक निकट है। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।