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قआयत 29

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

مَا يُبَدَّلُ ٱلْقَوْلُ لَدَىَّ وَمَآ أَنَا۠ بِظَلَّـٰمٍ لِّلْعَبِيدِ ﴿٢٩﴾

मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती और मेरा वादा नहीं टूटता, तथा मैं बंदों पर उनके अच्छे कामों को कम करके या उनके बुरे कामों को बढ़ाकर अत्याचार नहीं करता।बल्कि मैं उन्हें उनके किए का बदला देता हूँ।