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الطورआयत 21

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَـٰنٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَآ أَلَتْنَـٰهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَىْءٍ ۚ كُلُّ ٱمْرِئٍۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ ﴿٢١﴾

जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने भी ईमान में उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे, ताकि उनकी आँखों को सुकून मिले, भले ही वे उनके कामों (के स्तर) तक न पहुँचें हों। तथा हम उनके कामों के प्रतिफल में कुछ भी कमी नहीं करेंगे। हर इनसान अपने किए हुए बुरे काम के बदले बंधक है। कोई अन्य व्यक्ति उसकी ओर से उसके काम का कुछ भी बोझ नहीं उठाएगा।