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النجمआयत 17

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ﴿١٧﴾

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की निगाह दाएँ-बाएँ नहीं गई और न उस सीमा से आगे बढ़ी, जो उनके लिए निर्धारित की गई थी।