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الواقعةआयत 61

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ ﴿٦١﴾

कि हम तुम्हारी वर्तमान रचना और रूप को, जिसे तुम जानते हो, बदल दें और तुम्हें ऐसी रचना और रूप में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।