तफ़सीर अल-मुख़्तसर
بَلْ بَدَا لَهُم مَّا كَانُوا۟ يُخْفُونَ مِن قَبْلُ ۖ وَلَوْ رُدُّوا۟ لَعَادُوا۟ لِمَا نُهُوا۟ عَنْهُ وَإِنَّهُمْ لَكَـٰذِبُونَ ﴿٢٨﴾
बात ऐसी नहीं है जो उन्होंने कही है कि यदि उन्हें वापस भेज दिया जाए, तो वे अवश्य ईमान ले आएँगे, बल्कि उनके सामने वह स्पष्ट हो गया जो वे अपने कथन : (والله ربنا ما كنا مشركين) ''अल्लाह की क़सम! जो हमारा पालनहार है, हम मुश्रिक न थे।'' से छिपा रहे थे, जब उनके अंगों ने उनके खिलाफ़ गवाही दी। और यदि मान लिया जाए कि वे दुनिया में वापस लौट गए, तो निश्चय वे उसी कुफ़्र एवं शिर्क की ओर लौटेंगे, जिससे उन्हें रोका गया है और वे अपने इस वादे में झूठे हैं कि यदि वे वापस लौट गए तो ईमान लाएँगे।