तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَتِلْكَ حُجَّتُنَآ ءَاتَيْنَـٰهَآ إِبْرَٰهِيمَ عَلَىٰ قَوْمِهِۦ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَـٰتٍ مَّن نَّشَآءُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ ﴿٨٣﴾
यह तर्क, अर्थात् अल्लाह का कथन : ( ... فَأَيُّ الْفَرِيقَيْنِ أَحَقُّ بِالْأَمْنِ) ''तो दोनों पक्षों में से कौन सुरक्षा के अधिक योग्य है।'', जिसके द्वारा इबराहीम ने अपनी जाति को पराजित किया, यहाँ तक कि उनका तर्क समाप्त हो गया, यही हमारा तर्क है, जिसकी हमने उन्हें अपनी जाति के साथ बहस करने के लिए तौफ़ीक़ दी और उन्हें वह प्रदान किया। हम दुनिया तथा आख़िरत में अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, पदों में ऊँचा कर देते हैं। (ऐ रसूल!) आपका पालनहार अपनी रचना और प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, अपने बंदों को जानने वाला है।