तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَٰدَىٰ كَمَا خَلَقْنَـٰكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَـٰكُمْ وَرَآءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَآءَكُمُ ٱلَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَـٰٓؤُا۟ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ ﴿٩٤﴾
(मरने के बाद) दोबारा उठाए जाने के दिन उनसे कहा जाएगा : आज के दिन तुम हमारे पास अकेले आए हो, न तो तुम्हारे पास धन है और न ही सरदारी। जैसे हमने तुम्हें पहली बार नंगे पाँव, नंगे शरीर और खतनारहित पैदा किया था। और जो कुछ हमने तुम्हें दिया था, वह तुमने अपनी इच्छा के विरुद्ध संसार में छोड़ दिया। और हम आज तुम्हारे साथ तुम्हारे उन पूज्यों को नहीं देखते हैं, जिन्हें तुमने अपने लिए मध्यस्थ (सिफारिशी) होने का दावा किया था, तथा तुमने दावा किया था कि वे इबादत के योग्य होने में अल्लाह के साझी हैं। निश्चय तुम्हारे बीच का संबंध टूट गया, तथा जो कुछ तुम उनकी सिफारिश का दावा करते थे और यह कि वे अल्लाह के साझी हैं, वह (भ्रम) तुमसे दूर हो गया।