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الممتحنةआयत 1

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَتَّخِذُوا۟ عَدُوِّى وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَآءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِٱلْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا۟ بِمَا جَآءَكُم مِّنَ ٱلْحَقِّ يُخْرِجُونَ ٱلرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَـٰدًا فِى سَبِيلِى وَٱبْتِغَآءَ مَرْضَاتِى ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِٱلْمَوَدَّةِ وَأَنَا۠ أَعْلَمُ بِمَآ أَخْفَيْتُمْ وَمَآ أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ ﴿١﴾

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! मेरे दुश्मनों और अपने दुश्मनों को दोस्त न बनाओ कि उनसे मित्रता रखो और उनके प्रति प्रेम दिखाओं, जबकि उन्होंने उस धर्म का इनकार किया है, जो तुम्हारे नबी के द्वारा तुम्हारे पास आया है। वे रसूल को उनके घर से निकालते हैं तथा तुम्हें भी मक्का में तुम्हारे घरों से निकालते हैं। वे तुम्हारे बारे में रिश्ते-नाते का तनिक भी ख़याल नहीं करते। ऐसा केवल इस कारण करते हैं कि तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान ले आए हो। यदि तुम मेरे रास्ते में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता तलाश करने के लिए निकले हो, तो ऐसा न करो। तुम उनके प्रति स्नेह के तौर पर उन्हें गुप्त रूप से मुसलमानों की सूचनाएँ प्रदान करते हो, जबकि मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तुमने उसमें से क्या छुपाया है और क्या प्रकट किया है। मुझसे उसमें से या किसी और चीज़ में से कुछ भी छिपा नहीं है। और जो कोई भी काफिरों के प्रति दोस्ती और स्नेह का व्यवहार करेगा, तो वह सीधे रास्ते से हट गया, सत्य मार्ग से भटक गया और यथार्थ से अलग हो गया।