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الأعرافआयत 139

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَـٰطِلٌ مَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿١٣٩﴾

ये लोग जो अपनी मूर्तियों की पूजा में लगे हुए हैं, वे अल्लाह के अलावा की पूजा के जिस काम में लगे हुए हैं, वह नष्ट किया जाने वाला है और वे जो कुछ नेकी के कार्य करते चले आ रहे हैं, वह व्यर्थ (अमान्य) है, क्योंकि उन्होंने इबादत में अल्लाह के साथ दूसरों को साझी बनाया है।