×
الأعرافआयत 40

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا وَٱسْتَكْبَرُوا۟ عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَٰبُ ٱلسَّمَآءِ وَلَا يَدْخُلُونَ ٱلْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ ٱلْجَمَلُ فِى سَمِّ ٱلْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٤٠﴾

जिन लोगों ने हमारी स्पष्ट आयतों को झुठलाया और अहंकार करते हुए उन्हें मानने और उनके अधीन होने से इनकार कर दिया, वे हर प्रकार की भलाई से निराश हैं। उनके कुफ़्र के कारण उनके कार्यों के लिए आसमान के द्वार नहीं खोले जाएँगे, न ही उनकी आत्माओं के लिए जब वे मर जाएँगे। तथा वे कभी भी जन्नत में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि ऊँट - जो सबसे बड़े जानवरों में से एक है - सुई के छेद में प्रवेश न कर जाए, जो कि सबसे संकीर्ण चीज़ों में से है। और यह असंभव है। इसलिए जो चीज़ इसपर लंबित है यानी उनका जन्नत में प्रवेश करना, वह भी असंभव है। इसी बदले के समान अल्लाह उन लोगों को बदला देता है जिनके पाप बहुत बड़े हैं।