तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ كَـٰفِرُونَ ﴿٤٥﴾
ये ज़ालिम वही हैं, जो खुद भी अल्लाह की राह से दूर रहते थे और दूसरों को भी उससे दूर कर रहे थे, और आशा करते थे कि सत्य का रास्ता टेढ़ा हो जाए, ताकि लोग उसपर न चलें, तथा ये लोग आख़िरत का इनकार करने वाले हैं, उसके लिए तैयारी करने वाले नहीं हैं।