तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ٱدْعُوا۟ رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً ۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلْمُعْتَدِينَ ﴿٥٥﴾
(ऐ ईमान वालो!) अपने रब को पूरी विनम्रता के साथ और गुप्त रूप से पुकारो, निष्ठावान होकर केवल उसी से दुआ करो, दिखावा करने वाले या दुआ में उसके साथ किसी को साझी करने वाले न हो। निःसंदेह वह उन लोगों को पसंद नहीं करता, जो दुआ में उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, और दुआ में उसकी सीमाओं का सबसे बड़ा उल्लंघन उसके साथ किसी अन्य को पुकारना है, जैसा कि बहुदेववादी करते हैं।