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نوحआयत 25

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

مِّمَّا خَطِيٓـَٔـٰتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًا ﴿٢٥﴾

अपने पापों के कारण जो उन्होंने किए थे, वे इस दुनिया में बाढ़ में डुबो दिए गए और अपनी मृत्यु के तुरंत बाद आग में डाल दिए गए। तो (उस समय) उन्हें डूबने और आग से बचाने के लिए, अल्लाह के सिवा कोई मदद करने वाले नहीं मिले।