तफ़सीर अल-मुख़्तसर
كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ ﴿٢٦﴾
मामला वैसा नहीं है, जैसा मुश्रिकों ने समझ लिया है कि जब वे मर जाएँगे तो उन्हें यातना का सामना नहीं होगा। जब तुममें से किसी का प्राण उसके सीने के ऊपरी भाग (हँसली) तक पहुँच जाएगा।
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ ﴿٢٦﴾