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التكويرआयत 24

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍ ﴿٢٤﴾

और तुम्हारे साथी तुम्हारे लिए कृपण नहीं हैं कि वह तुम्हें वह बात पहुँचाने में कंजूसी करें, जिसका उन्हें तुमको पहुँचाने का आदेश दिया गया है। तथा वह काहिनों की तरह पारिश्रमिक भी नहीं लेते हैं।