तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَا تَقُمْ فِيهِ أَبَدًا ۚ لَّمَسْجِدٌ أُسِّسَ عَلَى ٱلتَّقْوَىٰ مِنْ أَوَّلِ يَوْمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِ ۚ فِيهِ رِجَالٌ يُحِبُّونَ أَن يَتَطَهَّرُوا۟ ۚ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلْمُطَّهِّرِينَ ﴿١٠٨﴾
(ऐ नबी!) आप इस तरह की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए मुनाफ़िक़ों के आमंत्रण को स्वीकार न करें। क्योंकि क़ुबा की मस्जिद, जिसे शुरू ही से तक़्वा (धर्मपरायणता) पर स्थापित किया गया है, आपका उसमें नमाज़ पढ़ना इस मस्जिद की तुलना में अधिक उपयुक्त है, जिसे कुफ़्र पर स्थापित किया गया है। क़ुबा की मस्जिद में ऐसे लोग हैं, जो अशुद्धियों और गंदगियों से पानी के द्वारा और पापों से तौबा और क्षमायाचना के द्वारा शुद्ध रहना पसंद करते हैं, और अल्लाह अशुद्धताओं, गंदगियों और पापों से शुद्ध रहने वालों को पसंद करता है।