तफ़सीर अल-मुख़्तसर
مَا كَانَ لِلنَّبِىِّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَن يَسْتَغْفِرُوا۟ لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوٓا۟ أُو۟لِى قُرْبَىٰ مِنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَحِيمِ ﴿١١٣﴾
नबी के लिए उचित नहीं है और न ही ईमान वालों के लिए उचित है कि वे मुश्रिकों के लिए अल्लाह से क्षमा याचना करें, भले ही वे उनके रिश्तेदार हों, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि वे शिर्क की अवस्था में मरने के कारण जहन्नमियों में से हैं।