तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَتْهُمْ رِجْسًا إِلَىٰ رِجْسِهِمْ وَمَاتُوا۟ وَهُمْ كَـٰفِرُونَ ﴿١٢٥﴾
जहाँ तक मुनाफ़िक़ों का संबंध है, तो अहकाम और कहानियों पर आधारित इस क़ुरआन का अवतरण उनके रोग और गंदगी को और बढ़ा देता है, क्योंकि वे उस उतरने वाली वह़्य को झुठलाते हैं। अतः क़ुरआन के अवतरण में वृद्धि के साथ उनके दिल की बीमारी बढ़ जाती है; क्योंकि जब भी कोई वह़्य उतरती थी, वे उसके बारे में संदेह करते थे और वे कुफ़्र ही की अवस्था में मर गए।