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التوبةआयत 19

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَجَعَلْتُمْ سِقَايَةَ ٱلْحَآجِّ وَعِمَارَةَ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ كَمَنْ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ وَجَـٰهَدَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ لَا يَسْتَوُۥنَ عِندَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿١٩﴾

(ऐ बहुदेववादियो!) क्या तुमने हाजियों को पानी पिलाने वाले और मस्जिद-ए-हराम की देखभाल करने वाले लोगों को उस व्यक्ति की तरह बना दिया, जो अल्लाह पर ईमान लाया और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाया, तथा क़ियामत के दिन पर ईमान लाया और अपने जान-माल के साथ जिहाद किया, ताकि अल्लाह की बात सबसे ऊँची हो और काफ़िरों की बात सबसे नीची? क्या तुमने इन दोनों प्रकार के लोगों को अल्लाह के यहाँ प्रतिष्ठा में बराबर कर दिया?! वे अल्लाह के यहाँ कदापि बराबर नहीं हो सकते। और अल्लाह बहुदेववाद जैसे अत्याचार में पड़े हुए लोगों को सामर्थ्य नहीं देता, भले ही वे हाजियों को पानी पिलाने जैसे अच्छे काम करते हों।