तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَوْمَ يُحْمَىٰ عَلَيْهَا فِى نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكْوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمْ وَجُنُوبُهُمْ وَظُهُورُهُمْ ۖ هَـٰذَا مَا كَنَزْتُمْ لِأَنفُسِكُمْ فَذُوقُوا۟ مَا كُنتُمْ تَكْنِزُونَ ﴿٣٥﴾
जो कुछ उन्होंने इकट्ठा किया और उसका हक़ रोक लिया, उसे क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में तपाया जाएगा। जब वह बहुत गर्म हो जाएगा, तो उसे उनके माथों, पहलुओं और पीठों पर रखा जाएगा, और उन्हें फटकार के रूप में कहा जाएगा : ये हैं तुम्हारे धन, जो तुमने एकत्र किए थे लेकिन उनमें अनिवार्य अधिकारों का भुगतान नहीं किए थे। तो अब, जो कुछ तुम इकट्ठा कर रहे थे और उसके अधिकारों का भुगतान नहीं कर रहे थे, उसका कष्ट और उसके परिणाम का स्वाद चखो।