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التوبةआयत 53

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ أَنفِقُوا۟ طَوْعًا أَوْ كَرْهًا لَّن يُتَقَبَّلَ مِنكُمْ ۖ إِنَّكُمْ كُنتُمْ قَوْمًا فَـٰسِقِينَ ﴿٥٣﴾

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जो कुछ तुम अपने धन में से खर्च करते हो, उसे स्वेच्छा से या अनिच्छा से खर्च करो। जो कुछ तुमने खर्च किया है वह तुम्हारे कुफ़्र और अल्लाह की अवज्ञा के कारण तुमसे कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।