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التوبةआयत 64

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

يَحْذَرُ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ أَن تُنَزَّلَ عَلَيْهِمْ سُورَةٌ تُنَبِّئُهُم بِمَا فِى قُلُوبِهِمْ ۚ قُلِ ٱسْتَهْزِءُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ مُخْرِجٌ مَّا تَحْذَرُونَ ﴿٦٤﴾

मुनाफ़िक़ इस बात से डरते हैं कि अल्लाह अपने रसूल पर कोई ऐसी सूरत न उतार दे, जो मोमिनों को, उनके दिल के अंदर मौजूद कुफ़्र से अवगत करा दे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम मज़ाक़ उड़ाते और धर्म (इस्लाम) के अंदर दोष निकालते रहो। निश्चय अल्लाह कोई सूरत उतारकर अथवा अपने रसूल को उसके बारे में सूचित करके, उस बात को प्रकट करने वाला है, जिससे तुम डर रहे हो।