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التوبةआयत 82

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلْيَضْحَكُوا۟ قَلِيلًا وَلْيَبْكُوا۟ كَثِيرًا جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿٨٢﴾

अतः जिहाद से पीछे रहने वाले इन मुनाफ़िक़ों को अपने नश्वर सांसारिक जीवन में थोड़ा हँसना चाहिए और उन्हें अपने बाक़ी रहने वाले आखिरत के जीवन में बहुत ज़्यादा रोना चाहिए। यह उस कुफ़्र, पाप और अवज्ञा का बदला है, जो उन्होंने दुनिया में कमाया है।