तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَا تُصَلِّ عَلَىٰٓ أَحَدٍ مِّنْهُم مَّاتَ أَبَدًا وَلَا تَقُمْ عَلَىٰ قَبْرِهِۦٓ ۖ إِنَّهُمْ كَفَرُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَمَاتُوا۟ وَهُمْ فَـٰسِقُونَ ﴿٨٤﴾
इन मुनाफ़िक़ों में से कोई मर जाए, तो (ऐ रसूल!) आप उसका कभी जनाज़ा न पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर उसकी क्षमा की प्रार्थना के लिए खड़े होना। क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और अल्लाह की अवज्ञा करते हुए मरे हैं। और जो कोई ऐसा हो, उसका न तो जनाज़ा पढ़ा जाएगा और न उसके लिए दुआ की जाएगी।